राजस्‍थान का सत्‍ता संग्राम: BJP विधायक की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई आज, बसपा MLA के कांग्रेस में विलय को चुनौती | jaipur – Information in Hindi


राजस्थान (Rajasthan) में सत्ता संग्राम के बीच कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) दोनों के लिए 27 जुलाई का दिन अहम है.

जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में सत्ता संग्राम के बीच कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) दोनों के लिए 27 जुलाई का दिन अहम है. क्योंकि आज ही बीजेपी विधायक मदन दिलवार की उस याचिका पर राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिसमें बहुजन समाज पार्टी (BSP) के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया कि बीएसपी राष्ट्रीय पार्टी है और पार्टी के विलय के बिना विधायकों का विलय अलग से कांग्रेस में नहीं हो सकता है. इसी को आधार बनाकर बीजेपी विधायक मामले को हाई कोर्ट में ले गए हैं. ये याचिका पहले राजस्थान विधानसभा में दायर की जा चुकी है.

बीजेपी विधायक दिलावर ने कहा कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के सामने four महीने पहले बीएसपी विधायकों के विलय के याचिका दायर की थी, लेकिन नए स्पीकर ने उन्हें न तो सुना न नोटिस दिया. इतना ही नहीं बिना जानकारी के कुछ दिन पहले स्पीकर ने यह याचिका खारिज कर दी. इसके बाद अब हाई कोर्ट के शरण में पहुंचा हूं. बता दें कि पिछले करीब 15 दिन से राजस्थान में सत्ता का संग्राम हो रहा है. राजस्थान में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सचिन पायलट अपने समर्थकों के साथ बगावत कर चुके हैं. कांग्रेस ने उन्हें पीसीसी अध्यक्ष और अशोक गहलोत सरकार ने उन्हें मंत्री पद से बर्खाश्त कर दिया है.
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बीएसपी ने जारी कि ​व्हिपबसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा ने ​विधायकों के कांग्रेस में विलय को वैध नहीं बताया है. मिश्रा द्वारा कहा गया है कि बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और जब तक पूरी पार्टी का विलय नहीं हो जाता 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय वैध नहीं है. ये सभी 6 विधायक बसपा के सिम्बल पर चुनाव जीतकर आए हैं. जो पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती द्वारा जारी किए गए थे. लिहाजा सभी 6 विधायक पार्टी के निर्देश मानने के लिए बाध्य हैं. सभी 6 विधायकों को पार्टी द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं और पार्टी के निर्देश मानने की हिदायत दी गई है. अब जबकि सियासी घमासान छिड़ा है तो पार्टी ने एक बार फिर से व्हिप जारी कर दिया है. अब जबकि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दसवीं अनुसूची के पैरा 2 (1)(A) पर बहस छिड़ी है.





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